About Me

Writer:-Jyoti Jain


Jyoti Jain is a hindi author who passionate to write stories, poems and shayaris. From last few years hindi is again trending with new inovations and ideas. undoubtely its a result of unconditional efforts of hindi writers. Jyoti is one of them. She love to romance with words. Her first hindi book named “Ibaadat ko ijaazat hai” a collection of short stories is recently released and much appreciated by readers. Currently she lives in rajasthan and discovering new stories. Many of her write-ups are featured in several anthologies, magazine and online portals.

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About My Book


इस एक छोटी सी जिन्दगी में इन्सान को चाहतों की प्यास इतनी है कि पूरा समंदर भी मिले तो लब सूखे ही लगते हैं। कोई कतरा भी मुहब्बत का दूर हो तो दिल तड़प उठता है। समूचा ब्रह्माण्ड है इश्क, तो बस किसी खास की मुस्कान है इश्क… इस किताब में है कुछ पाक इश्क की दास्तां, मिलने बिछड़ने के बहाने, और जीते-जूझते रिश्ते… इश्क़ ना मिले तो कहीं मर ही ना जाए हम… पढ़िए इश्क की ऐसी ही कहानियों को किताब "इबादत को इजाज़त है" में…

सरेआम सुगबुगाते हुए लफ्ज़, कहने की चाहत और बहुत कुछ कहना मुल्तवी भी करने वाली यह कलम, बेचैनियों और छटपटाती हसरतों के अनझिंप उजाले, अंधेरी रात की खामोशी में टूटता एक चुप्पा-सा तारा, बेमुरव्वत चाँदनी से अनकही बातें, सादे सपनों की समंदर-सी प्यास जैसी हैं इस किताब की कहानियाँ। ये कहानियाँ तटबंधों को खारिज करती हैं, ये कहानियाँ नए मुकाम को मंजिल भी नहीं मानती, और तो और, अपने लिए कोई नई परिभाषा गढ़ने की भी कतई ख्वाहिशमंद नहीं हैं ये कहानियाँ। खुद को बताने या छुपाने के मकसद से बेरुख हैं ये कहानियाँ। एक अहसास पर मर मिटने वाले हैं इन कहानियों के किरदार, तमाम शान-ओ-शौकत से कतई मुखातिब नहीं हैं ये किरदार, अपनी प्यास के साथ ये दूर सहरा तक भटकने को बेताब हैं, पर सूखे गले से भी ये प्रेम की एक कविता ज़रूर रचते हैं।

लब्बोलुआब "इबादत को इजाज़त है" में ऐसी कहानियां हैं जहां ज़माने की हकीकत से बेखौफ हो कर ज़माने से नज़र मिलाई गयी है पर कहानी के किरदार इस दौर की हकीकतों के आगे अपने इरादों और जज्बे को बदलने को कतई तैयार नहीं। वे ज़माने के लिए नहीं अपने जज्बातों के लिए जीना चाहते हैं और इन कोशिशों में जख्मी होने पर भी वे अपनी बनाई रविशों पर ही चलने के लिए जीते हैं; क्योंकि यही उनके जीने का मकसद भी है। अपनी ज़िंदगी के मकसदों को बेबाक कहने वाली ये कहानियां बेशक हिन्दी कहानी को परखने के तमाम उपायों-तरीकों से काफी दूर पर बेखौफ खडी हैं।


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