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ये जो है… वो ये क्यूं है…

2018-03-18

कभी कभी ऐसा होता है कि हमारे मन में बहुत कुछ चल रहा होता है लेकिन वो सब हम किसी से कह नहीं पाते। तब ऐसे हाल में कभी इशारों से, कभी अपने व्यवहार से हम अपनी बात कहने की कोशिश करते है कि शायद इसी तरह सामने वाला ये समझ जाए कि हम क्या कहना चाहते है। 2liners उसी तरह की एक कोशिश है जहां मैंने कम से कम शब्दों में ज्यादा से ज्यादा और गहरी बात कहने की कोशिश की है। अगर आपको पसंद आए तो कमेन्ट में बताइये और अगर कोई liner समझ ना आए तो पूछिए, कोशिश करूंगी की उस 2liner की अच्छे से व्याख्या कर सकूं। 

 

 

- ज्योति जैन

मां

2018-04-05

 

तुम मेरे लिये महा-मृत्युंजय के मंत्र सी हो,

जब-जब याद करती हुं, महफ़ुज महसुस करती हुं।

-ज्योति जैन

वफ़ा-बेवफ़ा

2018-04-08

 

 

 मैं तुझे याद रहूंगी, मिल्कियत-ए-वफ़ा की तरह।

मैं तुझे याद करूंगी, बादशाह-ए-बेवफ़ा की तरह।।

-ज्योति जैन

फितूर

2018-04-09

देखिये न फितूर कैसे पाले है मैंने...

छाले अपने ही दिल के हजारों, जिस्म पर अपने साले है मैंने...

-ज्योति जैन

बादल

2018-04-09

ये बादल आज जी भर के रो ना सका,

क्या मेरे हिस्से में कोई गम रह ना सका।

-ज्योति जैन

वो और मैं..

2018-04-09

वो मेरी वफ़ा का एक लफ्ज़ भी ना पढ़ सका...

 

और मैं हर लम्हा उसके दर्द की किताब लिखती रही ।

- ज्योति जैन