ABOUT ME

हिंदी लेखिका

"कभी किसी ठिकान पे नहीं रुकती,
जिन्दगी किसी निशान पे नहीं रुकती।"

बस ऐसी ही है कुछ अपनी भी शख्सियत, तुम हंस कर मिले तो तुम्हारे हो लिए। बाकी फिर हवा कि तरह अवारा हो लिए। अब दुनिया के बनाये रास्तों पर चलने से मेरे पैरों में कांटे चुभने लगते है। इसलिए गिरते पड़ते ही सही, पर मुझे पसन्द है अपने खुद के रास्ते बनाना। इक किस्मत अच्छी थी, जन्म राजस्थान में हुआ, वो भी मेवाड़ में, वो भी श्रीनाथ जी की नगरी नाथद्वारा में। पढ़ने और बढ़ने के लिये बायोलॉजी विषय चुना लेकिन तब लगा जैसे मैं सिर्फ़ शरीर भर को क्लास में ले जाती हूं, मेरे शरीर में बसने वाली आत्मा तो पिछली रात लिखी कुछ पंक्तियों में ही रह गई हो जैसे। बस फिर उसके बाद से अपना सबकुछ अपनी कलम और उससे निकलने वाले शब्दों को समर्पित कर दिया। ईश्वर ने सांसें दे दी और अब मैं बैठकर हर सांस में शब्द पिरो रही हूं। कोई बड़ी ख्वाहिशात नहीं पालती लेकिन खुद के फैसलों के परों से उड़ने के अपने हक को भी मैं नहीं छोड़ती। कुछ पत्रिकाओं में लेख लिखने के साथ ही अंग्रेजी के दो काव्य संग्रह (anthology) “राइम्स एण्ड रीद्म्स” और “लाईफनामा” में कुछ पन्नें भी अपने शब्दों से रंगे हैं। भटकने की शौकीन हूं लेकिन जब कहीं नहीं होती तो अपने ब्लॉग या पेज पर होती हूं। “इबादत को इजाज़त है” मेरी पहली हिन्दी किताब है।


ज्योति जैन

बेहद और बेखौफ है रास्तें, उबड़खाबड़ भी, मगर जिन्दगी इन रास्तों से बड़ी है। इसलिए हमें सिर्फ चलते जाना है। रूकने की भी कीमत चुकानी होती है और चलने की भी। बेहतर है चलकर कीमत चुकाई जाए, अफसोस नहीं होगा । मैनें जब ये सोचा कि किताब लिखनी है, तब बिलकुल नहीं पता था कि क्या लिखना है। बस ये पता था कि लिखना है। और फिर जब लिखना शुरू किया तो फिर खुद को रूकने का कोई बहाना नहीं दिया। मैं कई बार लिखती हूं  फिर पसंद नहीं आने पर अपने ही लिखे हुए को खुद ही मिटा देती हूं। क्योंकि मुझे पता है कि मैं आखरी सांस तक लिख सकती हूं। बिना थके लिख सकती हूं। मुझे कोई जल्दी नहीं है कहीं भी पहुंचने की, मैं बस हर गुजरता हुआ लम्हा जीना चाहती हूं। जिन्दगी लिख कर, जिन्दगी जी कर। लिखना मेरा जुनून है, मेरी जिद है, मेरा सपना है, मेरी मंजिल है, मेरी जिन्दगी है।

मैं हूं…
क्योंकि मैं लिखती हूं…

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